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जबसे रुपया गिर रहा, ठीक नहीं हालात।
मंहगाई भी बढ़ रही, निर्धन पर आघात।।
मंहगाई भी बढ़ रही, निर्धन पर आघात।।
निर्धन पर आघात, विदेशी हमें डराते।
करते रोज विवाद, नूतन टेक्स लगाते।।
बिगड़ी सारी सोच, माफ है कर्जा तबसे।
सोना हुआ है तेज, कायदे बिगड़े जबसे।।
2
मुफ्त राशन मिल गया,फोकट हुआ इलाज।
सोच बनी है आलसी, विकृत हुआ समाज ।।
विकृत हुआ समाज, रहा नहि भाई-चारा।
ठीक नहीं हालात, पंगु अब देश हमारा ।।
कहते कवि, बेढंग, देश में चलता शासन।
सोये पैर पसार, खा कर मुफ्त का राशन।।
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करते रोज विवाद, नूतन टेक्स लगाते।।
बिगड़ी सारी सोच, माफ है कर्जा तबसे।
सोना हुआ है तेज, कायदे बिगड़े जबसे।।
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मुफ्त राशन मिल गया,फोकट हुआ इलाज।
सोच बनी है आलसी, विकृत हुआ समाज ।।
विकृत हुआ समाज, रहा नहि भाई-चारा।
ठीक नहीं हालात, पंगु अब देश हमारा ।।
कहते कवि, बेढंग, देश में चलता शासन।
सोये पैर पसार, खा कर मुफ्त का राशन।।
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कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी
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