अमर पंखुड़ियां:- कविताएं, कहानियां, दोहे, छंद, हास्य-व्यंग, धार्मिक सामाजिक लेख पढ़ें। हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणादायक और मनोरंजक रचनाएं।
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दे दे मुझको ज्ञान शारदे, दे दे मुझको ज्ञान। मैं हूं याचक तेरे मठ का, रखना मेरा ध्यान।। स्वेत हंस की करो सवारी,बीणा रखतीं हाथ, मेरे मन में आन...
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कृष्ण-सुदामा श्याम वर्ण सुंदर नयन, शोभा होंठ अपार। वंशी अधर सुहावनी, तिलक सजा लिलार।। मोर मुकुट सिर पर...
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(1) पूस की इस भोर में,है ओस हर कोर में, घास बिछी कुटीर में, मड़ैया है फूंस की। रखी हांड अलाव में,बथुआ नहीं भाग्य में, ललन बैठे पास में, ...
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हर हर नर्मदे ***************************** मैया उर में भरो चेतना, छूटे जग का फेरा। अपनी ममता की आभा से, हर ले त...
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फिर से बचपन लौट के आता ----000---- फिर से बचपन लौट के आता,वही पुरानी दुनिया, घने पेड़ की छाया होती, वही पुरान...
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ऐंसी मेरी माता * बचपन में जैंसी देखा था, वैंसी आज भी माता, नया रंग और देख दिखावा, उसको नहीं सुहात...
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कक्का हैं बौराने **000** सावन भादों सूख गए थे, बैसाखों में हरियाने। बड़ी अनोखी काया उनकी,वे सदा फिरें बौराने। क...
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