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जीवन मिलना सरल नही है,मिले नहीं हर बार।
दीनों की सेवा करना ही, जीवन का आधार।।
धन संचय की क्षुधा मिटाकर,करना है उपकार।
सभी जीव में समता देखें,जीवन का आधार।।
रटो नहीं तुम माया माया, माया है बटमार।
माया से तो तन सुख मिलता,बनते हैं बदकार।।
जीवन का आधार सरलता, नित्य करें सहकार।
रोटी,वस्त्र,भवन बिन साथी,जीवन भी बेकार।।
पंच तत्व जीवों में होते,लिप्सा,क्षुधा विकार।
सबसे सच्ची प्रेम भावना, जीवन का आधार।।
आज वक्त की मांग यही है,और कई हकदार।
जीवों की सेवा करना ही,जीवन का आधार।।
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कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 28/10/25
जीवन मिलना सरल नही है,मिले नहीं हर बार।
दीनों की सेवा करना ही, जीवन का आधार।।
धन संचय की क्षुधा मिटाकर,करना है उपकार।
सभी जीव में समता देखें,जीवन का आधार।।
रटो नहीं तुम माया माया, माया है बटमार।
माया से तो तन सुख मिलता,बनते हैं बदकार।।
जीवन का आधार सरलता, नित्य करें सहकार।
रोटी,वस्त्र,भवन बिन साथी,जीवन भी बेकार।।
पंच तत्व जीवों में होते,लिप्सा,क्षुधा विकार।
सबसे सच्ची प्रेम भावना, जीवन का आधार।।
आज वक्त की मांग यही है,और कई हकदार।
जीवों की सेवा करना ही,जीवन का आधार।।
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कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 28/10/25
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