कर दो बंद खदान

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छेड़ा तुमने खूब धरा को, खोदे गिरिवर ताल।
धुंध धुंआ की भर वायु में, बहुत बजाते गाल।।
बिन मौसम बरसात कराते, बनते हैं नादान।
मकसद छोड़ो आय कमाना,करदो बंद खदान।।
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         कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 

 

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