हर हर नर्मदे
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मैया उर में भरो चेतना, छूटे जग का फेरा।अपनी ममता की आभा से, हर ले तमस घनेरा।
मैया रेवा रुद्र नंदनी, शरण तिहारी आए।
तेरी ममता बड़ी निराली, संतों ने बतलाए ।।
कल कल बहती तेरी धारा,मोहक तान सुनाए।
डम डम डमरू की नादो से,तट पर होत सबेरा..
मैया उर में भरो चेतना….
छूटे जग का फेरा।।1
तेरे निर्मल जल से माता, दुनिया प्यास बुझाए।
कंकर भी शंकर हो जाते, तेरे नीर डुबाए।।
अमरकंट से आकर तूने, हमको दरश दिखाए।
मठ मठ में हो आप विराजीं, नित्य लगातीं फेरा..
मैया उर में भरो चेतना….
छूटे जग का फेरा।।2
कोप किया ना तूने माता, तट पर नगर बसाए।
हरदम उनकी रक्षा करतीं, जिसने गुण हैं गाए।।
सौम्य रूप की छवि निराली,लाल ध्वजा लहराए।
घाट घाट पर संयासी भी, डाले अपना डेरा..
मैया उर में भरो चेतना…
छूटे जग का फेरा।।3
मिल जाए आंचल की छाया,जड़ चेतन हो जाए।
कल कल में संगीत समाया,मन मोहित हो गाए।
हर हर बोलें नाम साथ में, कलयुग नहीं सताए।।
कदम कदम पर भक्तों ने भी, तेरे तट को घेरा..
मैया उर में भरो चेतना…
छूटे जग का फेरा।।4
लाल रंग के लंहगा चूनर, तेरे मन को भाए।
मधुर मधुर हंसती हो मैया, मूरत बहुत सुहाए।
ग्राह सवारी करके माता, धाम धाम को जाए।।
सब भक्तो पर कृपा करके, करती दूर अंधेरा..
मैया उर में भरो चेतना,
छूटे जग का फेरा।।5
मैला मन भी धुल जाता है, जो भी नीर नहाए।
तेरे तट के दर्शन ने ही, सारे ताप हटाए।।
तेरे जल से मातु नर्मदा, कोढ़ी कोढ़ मिटाए।
मेरी बारी कब आयेगी, काहे करत अबेरा..
मैया उर में भरो चेतना,
छूटे जग का फेरा।
तेरी ममता की आभा से,
हर ले तमस घनेरा।।6
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🙏मां नर्मदा जी की जयंती 2026
भजन हरि गीतिका छंद
कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी
👉 दस्तूर निभाएं 🌹 मेरी स्वरचित रचना को अवश्य पढ़ें 🙏
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