होता वही महान

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झूठे वादे चाल प्रपंची, खुद का करें बखान।
कामुक होती उनकी नजरे, उर में रहे गठान।।
नहीं किसी के सगे कहाते,उनका नहीं समाज…
जिनके लहू बहे धूर्तता, होता वही महान।।
कभी किसी का करें भला तो, लेते पूरा दाम।
नहीं मुरौवत इनके मन में, मुख पर नहीं लगाम।।
दया भावना नहीं खून में, होता वही महान… 
गलती से गलती हो जावे, खींचे उसकी चाम।।
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         कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 

 

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