कर दो बंद खदान

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छेड़ा तुमने खूब धरा को, खोदे गिरिवर ताल।
धुंध धुंआ की भर वायु में, बहुत बजाते गाल।।
बिन मौसम बरसात कराते, बनते हैं नादान।
मकसद छोड़ो आय कमाना,करदो बंद खदान।।
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         कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 

 

विपदा में संगी

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उनको सब अपना कहें,रखे सभी का ध्यान।
विपदा में   संगी बने, होता    वही   महान।।
होता  वही महान, काम   जो  सबके आता।
सच्ची कहता बात, किसी   को नहीं सताता।।
बैठे उसी मचान, कोई कहे ना खिसको।
करते ऐसा काम, कहे ना घटिया उनको।।
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         कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी  



होता वही महान

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झूठे वादे चाल प्रपंची, खुद का करें बखान।
कामुक होती उनकी नजरे, उर में रहे गठान।।
नहीं किसी के सगे कहाते,उनका नहीं समाज…
जिनके लहू बहे धूर्तता, होता वही महान।।
कभी किसी का करें भला तो, लेते पूरा दाम।
नहीं मुरौवत इनके मन में, मुख पर नहीं लगाम।।
दया भावना नहीं खून में, होता वही महान… 
गलती से गलती हो जावे, खींचे उसकी चाम।।
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         कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 

 

महॅंगा हर सामान

             महॅंगा हर सामान 
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विषय भोग की कक्षा सस्ती,गलियन लगी दुकान,
सस्ती बिके यहां पर निष्ठा, महॅंगा हर सामान……

लिप्सा  में  लिपटा है  मानव, बनकर  बेईमान।
सस्ती  है नारी की इज्जत, सस्ता  है अपमान ।।
मात-पिता की लाज डुबाते, समझ रहे सम्मान।
खून यहां पर सस्ता मिलता, महॅंगा हर सामान...1

निकलें जब जब घर से लड़की, रस्ता हो सुनसान।
दिन भर चिंता रहे बाप को, रहे आस भगवान।।
पता नहीं किस दर से निकले,छुपा हुआ शैतान।
मात्र आबरू सस्ती दिखती,महॅंगा हर सामान…2

तरुणाई  उद्दंड  हुई  है, नहीं  लाज  का भान।
नहीं बची नारी में ममता, नहीं पुरुष  में ज्ञान।।
नुक्कड़ नुक्कड़ बैठ भेड़िए, करें  रोज   हैरान।
सस्ता है मदिरा लय जाना, महॅंगा हर सामान...3

लाज  देश  की धूमिल करके, बन  बैठे  यजमान।
फिर भी उनकी भूख मिटे ना,करें छली फरमान।।
मंच  मंच  पर  होते  रहते,  सुंदर   सुंदर   गान।
सस्ते हैं मजदूर यहां पर, महॅंगा  हर  सामान…..4
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          कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 

कर दो बंद खदान